“गाँव–ढाणियों में 250W कागज़ी लोड और 5kVA ट्रांसफ़ॉर्मरों के सहारे कैसे चलेगा ‘पीएम सूर्य-घर मुफ़्त बि

राजस्थान के गाँव–ढाणियों में उस दौर की बिजली व्यवस्था आज भी कागज़ों पर जिंदा है, जब न टीवी था, न मोबाइल, न पंखे का इतना लोड और न ही आधुनिक उपकरणों का बोझ। तब गाँवों के घरों में सिर्फ बल्ब और एक पंखे के हिसाब से 250 वाट (0.25 kW) या अधिकतम 500 वाट का कागज़ी लोड तय किया गया था। बिजली आपूर्ति के लिए खम्भों पर 5 kVA के छोटे-छोटे ट्रांसफ़ॉर्मर लगाए गए थे, जो उस समय पर्याप्त थे।
लेकिन वक्त बदल गया है—
अब हर घर में स्मार्टफोन है, इंटरनेट है, चार्जिंग पॉइंट हैं, कूलर-फ्रिज हैं, और सोलर रूफटॉप का दौर शुरू हो चुका है। मगर DISCOM का ढांचा आज भी उसी “पुरातन युग” में कैद है।

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